🛑 झालावाड़ के पिपलोदी गांव में सरकारी स्कूल की छत गिरने से मचा हड़कंप, अफसरों की अनदेखी उजागर📍 स्थान: पिपलोदी, झालावाड़ (राजस्थान)🗓️ तारीख: 26 जुलाई 2025📰 PNCT NEWS
डेस्कराजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में एक सरकारी स्कूल की छत गिरने की घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल भवन पिछले चार वर्षों से बेहद जर्जर स्थिति में था, और उन्होंने कई बार मरम्मत की मांग की थी — लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और स्कूल प्रशासन दोनों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
⚠️ पहले से थी चेतावनी, लेकिन किसी ने नहीं सुनीग्रामीणों ने बताया कि स्कूल की हालत देखकर उन्होंने कई बार शिकायत की थी।
अधिकारियों ने कहा था “अपनी तरफ से ठीक करवा लो”,वहीं शिक्षकों ने कहा कि “हर परिवार दो-दो सौ रुपये इकट्ठा करे तो छत डलवा देंगे”।
लेकिन किसी ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई।—💥 तेज धमाके के साथ गिरी छत, मची चीख-पुकारशुक्रवार को स्कूल भवन का एक हिस्सा अचानक तेज आवाज के साथ गिर गया।ग्रामीण बालकिशन ने बताया कि वह सड़क किनारे बैठे थे जब उन्होंने जोरदार धमाका सुना।”मोड़कर देखा तो पूरा हिस्सा मलबे में तब्दील हो चुका था, बच्चे चीख रहे थे,” उन्होंने बताया।गांव वालों ने मिलकर स्लैब और पत्थर हटाकर बच्चों को बाहर निकाला।घायल बच्चों को ग्रामीणों ने निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाया, क्योंकि एंबुलेंस लगभग 45 मिनट बाद पहुंची।
😢 गांव में मातम, चूल्हा नहीं जलाहादसे के बाद पूरा गांव शोक में डूबा रहा। किसी भी घर में खाना नहीं बना, गांववालों ने सिर्फ बच्चों के लिए प्रशासन द्वारा भेजा गया खाना ग्रहण किया।—
👥 सियासी पहुंच: पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सांसद दुष्यंत सिंह गांव पहुंचेघटना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे देर शाम गांव पहुंचीं और कहा कि”अगर स्कूल पहले से खतरनाक घोषित होता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।”उनके साथ झालावाड़ के सांसद दुष्यंत सिंह भी मौजूद थे।—
🧱 “मरम्मत तो चार साल पहले हुई थी” – ग्राम विकास अधिकारी का जवाबग्राम विकास अधिकारी दौलत गुर्जर ने कहा कि”स्कूल भवन की मरम्मत चार साल पहले हो चुकी थी, इसलिए यह कहना कि तभी से छत जर्जर थी, सही नहीं है।”जबकि ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बरसात में छत से पानी टपकता था, और दीवारें लगातार कमजोर हो रही थीं।—
🚨 सरपंच ने खुद चलाया जेसीबी, 13 बच्चों को निकाला बाहरगांव के सरपंच रामप्रसाद लोढ़ा ने बताया कि”हमने जेसीबी मंगवाई और तुरंत मलबा हटाने का काम शुरू किया। 13 बच्चों को बाहर निकाला गया और दोपहिया वाहनों से अस्पताल पहुंचाया।”उन्होंने यह भी बताया कि एंबुलेंस करीब 45 मिनट देरी से पहुंची।—❗ PNCT NEWS की अपील:“क्या हमारे बच्चों की ज़िंदगी इतनी सस्ती है कि अफसर सिर्फ कहकर बच जाएं?क्या ग्रामीण स्कूलों की सुध लेने के लिए किसी हादसे का इंतज़ार ज़रूरी है?”—
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