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जयपुर : केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है. गजेंद्र सिंह शेखावत ने जहां गहलोत पर उनकी माता का अपमान करने का आरोप लगाया तो वहीं गहलोत ने कहा कि उन्होंने उनकी माता या किसी अन्य महिला का अपमान नहीं किया है. ऐसे उनके संस्कार नहीं हैं कि किसी महिला का अपमान किया जाए.
गहलोत ने रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राजस्थान में सरकार बदलते ही 2 महीने में नई रिपोर्ट बन गई और गजेंद्र सिंह शेखावत को क्लीन चिट दे दी गई. गजेंद्र सिंह शेखावत जब हाईकोर्ट गए थे तो उन्होंने से 482 में एफआईआर को क्वैश करने की मांग की थी. हाईकोर्ट ने भी कहा था कि एसओजी रिपोर्ट में जब आरोपी नहीं है तो हम क्या करें?
नियत खराब होती तो कई लोग जेल में होते : पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि कांग्रेस सरकार में संजीवनी घोटाले में 2 साल तक जांच चली. गहलोत का दावा है कि उन्होंने एसओजी से पूछा था कि मामले में गजेंद्र सिंह शेखावत सहित उनके परिवार के लोगों के नाम थे. इस आधार पर उन्होंने नाम सार्वजनिक किए थे. जनता को लगना चाहिए था कि सरकार उनके साथ खड़ी है. उस समय मुख्यमंत्री के साथ-साथ गृहमंत्री का भी पदभार उनके पास ही था.
सरकार की जिम्मेदारी थी पीड़ितों को न्याय दिलाना. अगर भाजपा सरकार की तरह हमारी भी नियत खराब होती तो 2 महीने में रिपोर्ट तैयार कर देते और कई लोग उस वक्त जेल में होते. हमने कानून के दायरे में रहकर 2 साल ईमानदारी से जांच की थी, लेकिन हमारी रिपोर्ट आने से पहले ही गजेंद्र सिंह शेखावत हाईकोर्ट पहुंच गए.
पीड़ित भी राजपूत समाज से ही हैं : गहलोत ने कहा कि जोधपुर, बाड़मेर सहित कई जिलों में हजारों ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अपने गहने और जमीन बेचकर इसमें पैसा इन्वेस्ट किया था. उस वक्त गजेंद्र सिंह शेखावत और उनके परिवार के लोग संजीवनी को काफी प्रमोट कर रहे थे और इसके प्रमाण भी हैं. हमने उनके परिवार की किसी महिला को तंग नहीं किया है. अगर कोई पुरुष गलत काम कर रहा है तो उसके लिए महिला कैसे जिम्मेदार हो सकती है? गहलोत ने कहा कि संजीवनी घोटाले में ज्यादातर पीड़ित भी राजपूत समाज से ही हैं.
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माफी का सवाल ही नहीं : केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की ओर से माफ नहीं किए जाने को लेकर गहलोत ने कहा कि ‘माफी मांग कौन रहा है? माफी का सवाल ही नहीं है. अगर आप (शेखावत) दोषी नहीं हो तो हम दोनों मिलकर पीड़ित लोगों के पास चलते हैं और उन्हें न्याय कैसे मिले, उनका पैसा वापस कैसे आए इस दिशा में काम करते हैं’.
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देश में विवाद चलते रहते हैं : वहीं, महाराष्ट्र में हिंदी भाषा और मराठी पर हुए विवाद को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग भाषाएं हैं. इतना बड़ा मुल्क है. इस तरह की बातें होती रहती हैं. इसमें कुछ लोगों का सामाजिक और राजनीतिक एजेंडा होता है, इसलिए मैं समझता हूं कि यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है.
